(N/A) रेडियोधर्मी क्षय का नियम बताता है कि किसी भी रेडियोधर्मी नमूने में,प्रति इकाई समय में क्षय होने वाले नाभिकों की संख्या नमूने में मौजूद नाभिकों की कुल संख्या के समानुपाती होती है।
मान लीजिए कि समय $t$ पर नमूने में नाभिकों की संख्या $N$ है,और छोटे समय अंतराल $\Delta t$ में क्षय होने वाले नाभिकों की संख्या $\Delta N$ है। नियम के अनुसार:
$\frac{\Delta N}{\Delta t} \propto N$
चूंकि समय के साथ नाभिकों की संख्या $N$ घटती है,इसलिए $N$ के परिवर्तन की दर ऋणात्मक होती है। अतः,हम लिखते हैं:
$-\frac{dN}{dt} = \lambda N$
जहाँ $\lambda$ क्षय नियतांक या विघटन नियतांक है।
समाकलन के लिए पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$\frac{dN}{N} = -\lambda dt$
दोनों पक्षों का समाकलन करने पर:
$\int_{N_0}^{N} \frac{dN}{N} = -\int_{0}^{t} \lambda dt$
$\ln(N) - \ln(N_0) = -\lambda t$
$\ln\left(\frac{N}{N_0}\right) = -\lambda t$
दोनों पक्षों का घातांक (exponential) लेने पर:
$N(t) = N_0 e^{-\lambda t}$
यह रेडियोधर्मी क्षय का नियम है,जहाँ $N_0$,$t = 0$ पर नाभिकों की प्रारंभिक संख्या है।